एक जिहाद और सैकड़ों के घर बर्बाद

नवंबर 2008 मुंबई एक पाकिस्तानी इस्लामी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने 4 दिन तक वह 12 जगह गोलीबारी वह बम विस्फोट किए ।हमले जिनकी व्यापक रूप से वैश्विक निंदा की गई बुधवार, २६ नवंबर को शुरू हुए और शनिवार, २९ नवंबर २००८ तक चले, १५५ मासूम लोगों की मौत हो गई और कम से कम ३०८ मासूम घायल हो गए।

इस मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले पर बनी movie देखी , Hotel Mumbai

तारीफ करना चाहूंगा फिल्म निर्माता की जिसने इतने जतन व मेहनत से बर्बरता को दर्शाया किस प्रकार मनुष्य दूसरे मनुष्य का दुश्मन हो जाता है। कैसे एक मनुष्य दूसरे मनुष्य की जान ले लेता है , सिर्फ इसलिए उसको ये यह पढ़ाया वह सिखाया गया जिहाद के रास्ते में जो भी आए उसको मार दो , वो इंसान नहीं है ...... वोह एक काफिर है।

इस मूवी में यह भी दर्शाया गया किस प्रकार आतंकवादी संगठन चंद पैसों के लालच देकर गरीब नौ जवान मुसलमानों को गुमराह करके उन्हें जिहाद के नाम पर उक साकर , सैकड़ों लोगों की निर्मम हत्या करने के लिए प्रेरित कर देते हैं ।

एक तरफ गोली लगने से घायल आतंकवादी , अपनी आने वाली मौत को देखते हुए अपने घर पाकिस्तान में रह रहे अपने परिवार से बात करता है व उनको पैसे मिले या नहीं मिले इसकी चिंता जताता है । व अपने पिता को घर के सभी लोगों का ख्याल रखने की प्रार्थना करता है। मगर इसके बावजूद उसके जेहन में कट्टरपंथी जिहादियों का जुनून कम नहीं होता । अपने आका के हुकुम की तामिल करते हुए , एक-एक करके सब लोगों को गोली मार देता है ।  सिर्फ एक महिला को छोड़ देता है क्योंकि वह मुस्लिमो कि कुरान का कोई भाग पढ़ रही होती है।

इस पूरी मूवी में यह दर्शाया गया किस प्रकार एक अच्छे वातावरण में पले लोग अपने होटल में आए मेहमानों को भगवान मानते है  और अपनी जी जान लगाकर ज्यादा से ज्यादा मेहमानों की जान बचा लेते हैं वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में पले जिहाद की राह पर चलकर निहत्थे मासूम लोगों की हत्या कर देते हैं।

यह एक मूवी बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है आखिर कौन सी कुरान में लिखा है मासूम लोगो को काफिर बोल कर हत्या कर दो ? आखिर क्यों इन आतंकवादियों एक पल भी दर्द नहीं हुआ मासूमों को गोली बम से मारते हुए यह कैसा जुनून है?

लोग गिड गिड़ते रहे व इन आतंकवादियों से गुहार लगाते रहे कि उनका भी परिवार है उनके भी बच्चे हैं उनको मत मारो मगर उन्होंने तब भी उन्हें मार डाला यह मंज़र बहुत ही दर्दनाक रहा होगा ।

आज भी इंसानियत के दुश्मन लश्करे तोइबा के आतंकवादी बेखौफ पाकिस्तान में घूम रहे हैं। शायर आज भी एक और जिहाद की तैयारी कर रहे होंगे। कई नौजवानों को इस्लाम के नाम पर , उनके दिमाग में जिहाद का बारूद भर रहे हो ।

अल्लाह को मानने वाले लोगों , अल्लाह के लिए ही लोगों को मत मार यह लोग भी तुम्हारे परिवार के समान है ।

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